संस्कार उसका आभूषण है| सत्कर्म ही उसकी पूजा है| दया ही उसका दान है| मनुर्भव अर्थात मनुष्यता ही उसका धर्म है| संतोष ही उसकी पहचान है| बुद्धि ही उसका सबसे बड़ा बल है|
कर्तव्यों एवं संकल्पो का निर्वहन करना उसकी सेवा है|
माता - पिता ही उसके देवता है| परमपिता परमेश्वर
" श्री राम " चन्द्र उसके भगवान है|
चारो नदिया , चारो वेद | चारो धाम में रहते प्राण है | इसी लिए तो मेरा भारत महान || इसी लिए तो मेरा भारत महान || जिसने बात समझ लिया है बन्धु ! उसको " जय जय श्री राम "
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