Saturday, 31 May 2014

मन्दिर में भगवान के दर्शन करने से पूर्व रखे विशेष ध्यान :



मन्दिर में देव दर्शन करने के लिए पुराणोक्त बत्तीस बातो का सदा ध्यान रखना चाहिए| अन्यथा आपके  जनित भूल से सह देवता कुपित हो ,अनिष्ट कर देते है|   

१ = भगवान के मंदिर में जूते - मोजा - चप्पल पहन कर या घोड़े बैल आदि जीव की सवारी करके जाना
२ =जन्माष्टमी, प्रतिष्ठादिवस अन्य भगवत संबन्धी उत्सवों भण्डारों को न करना और ना जाना
३ = भगवान के सन्मुख शीश झुकाये बिना नेत्र नेत्र मिला कर उन्हें प्रणाम करना
४ =अशुद्ध अवस्था में भगवान के मंदिर में प्रवेश व दर्शन करना
५ = एक ही हाथ से भगवान को प्रणाम करना
६ = भगवान के सन्मुख खड़े हो कर एक ही स्थान पर परिक्रमा करना
७ = भगवान के सन्मुख पैर फैला कर बैठ जाना
८ = भगवान के सन्मुख देवालय के चौखट पर पैर रख कर प्रवेश करना
९  = भगवान के सन्मुख निद्रा शयन करना
१०= भगवान के सन्मुख देवालय में भोजन करना जूठन गिरना
११= भगवान के सन्मुख या देवालय में झूठ बोलना
१२= भगवान के सन्मुख देवालय में उच्च स्वर में बोलना
१३= भगवान के सन्मुख देवालय में परस्पर मिथ्या भाषण करते जाना
१४=भगवान  के सन्मुख जोर जोर से रोना ,चिल्लाना किसी कोषना
१५= भगवान के सन्मुख झगड़ा गाली  गलौज करना
१६= भगवान के सन्मुख किसी को पीड़ा देना अपमानित करना
१७= भगवान के सन्मुख किसी का अनुग्रह ना करना
१८=भगवान  के सन्मुख या देवालय में स्त्री से राग पूर्वक बाते करना
१९= भगवान के सन्मुख कम्बल ओढ़ना
२०= भगवान के सन्मुख दुसरे की निन्दा करना
२१= भगवान के सन्मुख दुसरे से प्रार्थना या चपलूसी करना
२२= भगवान के सन्मुख अश्लील बाते कहना
२३= भगवान के सन्मुख अधोवायु का त्याग करना
२४= भगवान के सन्मुख समर्थवान हो कर भी सामान्य उपचार से पूजन करना
२५= भगवान के सन्मुख भोग लगाये बिना ही ग्रहण करना
२६= भगवान के सन्मुख जिस ऋतू में जो फल आया हो पहले न चढ़ाना
२७= भगवान के सन्मुख बचे हुए उपयोग किये शाक- फल चढ़ाना
२८= भगवान के सन्मुख पीठ करके बैठना
२९= भगवान के सन्मुख गुरु वंदना किये बिना पूजन करना
३०= भगवान के सन्मुख गुरु का अपमान या परिहास करना
३१= भगवान के सन्मुख अन्य देवताओ या देवालयों की तुलनात्मक विवेचना करना
३२= भगवान के सन्मुख अपराध करके सीधे अपने को अपराध से मुक्त समझना
                     
                                                             ( पद्म पुराण ,पाताल ७६/३६-४४)
                                                                    आचार्य  विमल  त्रिपाठी 

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