Tuesday, 11 March 2014

हमे चार ही यजमान कि कामना है जो चार वेद के सामान देदीप्यवान हो|


हमे अट्ठारह भगत कि कामना है जो पुराणों सा स्तवन रखते हो|

हमे तेरह ब्राह्मण कि कामना है  जो उपनिषद के वेत्ता हो| 

हमे सत्य सनातन धर्म को सुव्यवस्थित करने से कोई भी आसुरीय शक्ति नहीं रोक सकती|

                                                                  "जय श्री राम " 

                                                             आचार्य विमल त्रिपाठी 

अपनी बात ...........................

"फिर ब्रह्म तत्व कि प्राप्ति से कोई भी देवासुर तुम्हे नहीं वंचित कर सकता  परमात्म सत्ता ही ब्रह्म तत्व है" 

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